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बाबा रामदेव ने दवा माफिया और स्वदेशी व भारतीयता विरोधी ताकतों पर बोला हमला

हरिद्वार, न्यूज़ आई। आयुष मंत्रालय, भारत सरकार को हमने अपने क्लीनिकल कंट्रोल्ड ट्रायल की सभी डाक्यूमेंट्स उपलब्ध करा दिए हैं, तथा मंत्रालय ने यह भी स्वीकार किया है कि पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन ने कोविड-19 के मैनेजमेंट के लिए सभी आवश्यक कार्यवाही सुचारू रूप से संचालित की है। आयुष मंत्रालय तथा पतंजलि में अब इस विषय पर कोई भी असहमति नहीं है।
आयुष मंत्रालय के निर्देश के अनुसार, दिव्य कोरोनिल टैबलेट, दिव्य श्वासारी वटी एवं दिव्य अणु तेल, जैसा कि स्टेट लाइसेंस अथॉरिटी, आयुर्वेद-यूनानी सर्विसेज, उत्तराखंड सरकार से निर्माण एवं वितरण करने की जो पतंजलि को अनुमति मिली हुई है, उसके अनुरूप अब हम इसे सुचारु रुप से संपूर्ण भारत में निष्पादित कर सकते हैं।
आयुर्वेदिक ड्रग्स लाइसेंस व क्लीनिकल कन्ट्रोल ट्रायल की दोनों धारायें बिलकुल अलग हैं। आयुर्वेद की सभी दवाओं के लाइसेंस की प्रक्रिया उनके परम्परागत गुणों के आधार पर ही है। इसके उपरान्त ही उनके साइन्टिफिक ट्रायल एवं वैलीडेशन को फॉलो किया जाता है। पतंजलि एवं दिव्य फार्मेसी ने भी दिव्य कोरोनिल टैबलेट एवं दिव्य श्वासारि वटी का औषधि लाइसेंस परम्परागत औषधि उपयोग के आधार पर ही लिया है और तदोपरान्त मॉडर्न रिसर्च बेस्ड क्लीनिकल ट्रायल को इससे जोड़ा गया है। कोविड-19 पॉजिटिव रोगियों पर, पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट, हरिद्वार एवं छप्डै यूनिवर्सिटी, जयपुर ने संयुक्त रूप से रेंडमाइज्ड प्लेसिबो-कंट्रोल डबल-ब्लाइंड क्लिनिकल ट्रायल किया, और इसके सकारात्मक परिणाम हमने 23 जून, 2020 को देश के सामने प्रस्तुत (डिस्क्लोज) किये। इसमें 15 से 65 आयु वर्ग के (स्त्री-पुरुष सम्मिलित) 95 रोगियों (ऐसिम्प्टोमैटिक, माइल्ड टू मोडरेट) ने स्वेच्छा से भाग लिया, इसमें से 45 रोगियों को पतंजलि की औषधियाँ दी गई एवं शेष 50 रोगियों को प्लेसिबो दिया गया। पतंजलि की औषधिायाँ वाले ग्रुप के कोविड-19 रोगी, 3 दिन में 67ः तथा 7 दिन में सभी 45 रोगी, अर्थात 100 प्रतिशत रोगी, कोविड-19 नेगेटिव पाए गए। हम अब इन औषधियों के मल्टीसेन्ट्रिक क्लीनिकल ट्रायल की दिशा में अग्रसर हैं। कुछ दवा माफिया और स्वदेशी व भारतीयता विरोधी ताकतें चाहें लाख हमें बदनाम करने की नाकाम कोशिश करें, कितने ही हम पर पत्थर फेंके, हम दृढ़ संकल्पित हैं कि इन्हीं पत्थरों की सीढ़ियां बनाकर अपनी मंजिलें पायेंगे। एक तरफ हम भारत को विश्व गुरु या विश्व की महाशक्ति बनाने का सपना देखते हैं, लोकल को ग्लोबल तथा उसके लिए वोकल होकर, आत्मनिर्भर भारत बनाना चाहते हैं। सत्यमेव जयते, सेवाधर्म, मानवधर्म एवं राष्ट्रधर्म ही हमारा परम धर्म है।