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रक्षा मंत्री, यूपी सीएम हरिद्वार स्थित सप्तऋषि मैदान में आयोजित त्रिदिवसीय गुरुदेव समाधि मंदिर मूर्ति स्थापना महोत्सव में शामिल हुए

देहरादून, न्यूज़ आई : रक्षा मंत्री, यूपी सीएम और केंद्रीय मंत्री हरिद्वार स्थित सप्तऋषि मैदान में आयोजित त्रिदिवसीय गुरुदेव समाधि मंदिर मूर्ति स्थापना महोत्सव में शामिल हुए। यहां महोत्सव में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा उत्तराखंड के चार धाम वास्तव में भारत की आध्यात्मिक चेतना के आधार हैं। कहा कि पहले रामभक्तों का अपमान होता था तब देश की विरासत का अपमान होता था। अब राष्ट्र की विरासत रामभभक्तों का सम्मान होता है। किसी ने सोचा नहीं था कि राम मंदिर बनेगा, लेकिन मंदिर बना और भव्य बना।

मारोह के समापन अवसर पर केन्द्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह, भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री बृजेश पाठक तथा जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर श्री अवधेशानंद गिरि महाराज सहित अनेक संत-महात्मा एवं गणमान्य अतिथियों ने गुरुदेव स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज के समाधि स्थल पर पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
तीन दिवसीय इस भव्य आयोजन में देशभर से संत-महात्मा, धर्मगुरु, सामाजिक कार्यकर्ता एवं राजनीतिक नेतृत्व उपस्थित रहा। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्र चेतना, सनातन संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा तथा मानव सेवा जैसे विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।
केन्द्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने गंगा तट पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि इस पावन अवसर पर उपस्थित होना उनके लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने मां गंगा को नमन करते हुए ऋषि-मुनियों की स्मृतियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हैं, किंतु उनकी साधना, विचार और जीवन दर्शन आज भी समाज को मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा उनके जीवन मूल्यों और विचारधारा को पुनः जागृत करने का प्रतीक है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि हरिद्वार केवल एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना का केंद्र है। यहीं से भारतीय संस्कृति की अखंड धारा प्रवाहित होती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की रक्षा केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी सांस्कृतिक जड़ों की सुरक्षा भी उतनी ही आवश्यक है। यदि संस्कृति कमजोर होती है तो राष्ट्र भी कमजोर हो जाता है। उन्होंने सनातन संस्कृति, अद्वैत वेदांत, भक्ति परंपरा और गुरु-शिष्य संवाद को भारत की आत्मा बताया।

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