हरिद्वार भूमि खरीद घोटाले में धामी सरकार का बड़ा एक्शन, पूर्व नगर आयुक्त की बर्खास्तगी और तत्कालीन डीएम पर मेजर पनिशमेंट की संस्तुति
देहरादून, न्यूज़ आई : हरिद्वार नगर निगम के भूमि घोटाले में धामी सरकार की कार्रवाई राज्य के इतिहास में अब तक के सबसे बड़े फैसले के रूप में मानी जा रही है। आज तक के इतिहास में इतनी बड़ी संख्या में अफसर-कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई है। हालांकि 2002 में एक डीएम जरूर सेवा से बर्खास्त हो चुके हैं। हरिद्वार नगर निगम ने 15 करोड़ की जमीन 54 करोड़ में खरीदकर जो भ्रष्टाचार किया था, उस पर सरकार पहले ही दिन से सतर्क और गंभीर दिखी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल प्रथम दृष्टया आरोपी मानते हुए डीएम कर्मेन्द्र, नगर आयुक्त वरुण चौधरी, एसडीएम अजयवीर समेत 12 से ज्यादा अफसर-कर्मचारियों को निलंबित कर जांच बैठा दी थी। सचिव रणवीर सिंह चौहान ने मौके पर पहुंचकर मामले की जांच की थी। उन्होंने शासन को जो रिपोर्ट दी, वहीं से इन सभी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का मजबूत आधार बनना शुरू हुआ। इसके बाद एक ओर जहां अफसर-कर्मचारियों की विभागीय जांचें हुईं तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री धामी ने विजिलेंस को भी जांच के निर्देश दिए। चारों और से जांच से घिरे आरोपियों का षड्यंत्र और मिलिभगत अब खुलकर सामने आ गई। इनमें से ज्यादातर अफसर-कर्मचारी पिछले एक साल से अधिक समय से निलंबित चल रहे हैं। यह कार्रवाई राज्य के इतिहास में वर्षों तक याद रखी जाएगी।
