Cabinet Baithak: उत्तराखंड में श्रमिकों को हर महीने 7 तारीख तक मिलेगी मजदूरी, ओवरटाइम पर मिलेगा दोगुना भुगतान
देहरादून, न्यूज़ आई : उत्तराखंड के संगठित और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लाखों श्रमिकों के लिए राहत भरी खबर है. राज्य सरकार ने केंद्र सरकार की ओर से लागू की गई मजदूरी संहिता 2019 की धारा 67 और औद्योगिक संबंध संहिता 2020 की धारा 99 के तहत दो नई नियमावलियां तैयार की है. इसमें उत्तराखंड मजदूरी संहिता नियमावली 2026और उत्तराखंड औद्योगिक संबंध नियमावली 2026 शामिल है. 7 अगस्त को कैबिनेट की बैठक के दौरान दोनों नियमावली को मंजूरी दे दी गई है. श्रम कानूनों के सरलीकरण और कामगारों के कल्याण की दिशा में इसे एक बड़ा कदम माना जा रहा है. नई उत्तराखंड मजदूरी संहिता नियमावली 2026 में सबसे अहम प्रावधान भुगतान की समयसीमा को लेकर है. जिसके तहत अब हर महीने की 7 तारीख तक मजदूरी का भुगतान करना अनिवार्य होगा. दरअसल, मजदूरी में देरी श्रमिकों की सबसे पुरानी और सबसे आम शिकायत रही है. खासकर निर्माण, फैक्ट्री और ठेका मजदूरी में लगे कामगारों के लिए समय पर मजदूरी न मिलना एक बड़ी चुनौती बनती रही है. क्योंकि, तय समय पर मजदूरी न मिलने की व्यवस्था से महीने का घरेलू का खर्च, बच्चों की फीस और राशन जैसी जरूरतें प्रभावित नहीं होती थी. इसके साथ ही मजदूरी में कटौती और हेरा फेरी पर रोक लगाने के लिए नियमावली में मजदूरी का भुगतान डिजिटल माध्यम से किए जाने की व्यवस्था की गई है.
इसका सीधा फायदा ये होगा कि बीच में होने वाली अनौपचारिक कटौती, हिसाब में गड़बड़ी और कैश में कितना दिया? जैसे विवाद खत्म हो जाएंगे. क्योंकि, हर भुगतान का रिकॉर्ड मौजूद रहेगा. इतना ही नहीं तय कार्य घंटों से ज्यादा काम करने पर श्रमिक को सामान्य दर से दोगुनी मजदूरी मिलेगी. इसके साथ ही न्यूनतम मजदूरी की व्यवस्था को भी नियमावली में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है. ‘समान काम, समान वेतन’ पर भी इस नियमावली में जोर दिया गया है. नियमावली में लैंगिक असमानता के आधार पर मजदूरी की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है. पुरुष और महिला श्रमिक को समान कार्य के लिए समान वेतन मिलेगा. खेत, निर्माण स्थल और छोटी इकाइयों में महिलाओं को कम मजदूरी देने की परंपरा पर ये प्रावधान सीधी चोट करता है. साथ ही दावों के निस्तारण के लिए सुगम व्यवस्था बनाई गई है. ताकि, शिकायत करने वाले श्रमिक को लंबी प्रक्रिया में न उलझना पड़े.
