Breaking News
  • दून की कैंट भाजपा के लिए सुरक्षित सीट, लेकिन बड़ा सवाल हरबंस कपूर का उत्तराधिकारी कौन होगा ?
  • लैंसडाउन विधानसभा: लैंसडाउन से चुनाव लड़ने के हरक सिंह रावत की बहू अनुकृति ने दिए संकेत
  • आचार संहिता के बाद मनमाने ट्रांसफर पर चुनाव आयोग के तेवर तल्ख
  • Uttarakhand Election 2022: कांग्रेस जारी कर सकती हैं प्रत्याशियों की पहली लिस्ट, 45 नामों पर लग सकती है मुहर
  • मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास में पद्मश्री डॉ. बी.के.एस. संजय को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया

छोटे राज्यों में विधान परिषद का गठन धन की बर्बादीः महाराज

देहरादून, न्यूज़ आई। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री के उत्तराखंड में विधान परिषद की वकालत करने पर वरिष्ठ भाजपा नेता और कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा है कि देशभर के छोटे राज्यों में विधान परिषद का कोई उदाहरण नहीं है। इसलिए उत्तराखंड में विधान परिषद बनाए जाने की बात कहना सरासर बेईमानी और जनता के पैसों की बर्बादी के सिवाय और कुछ नहीं है।
वरिष्ठ भाजपा नेता एवं कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के उत्तराखंड में विधान परिषद बनाए जाने के विषय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में विधान परिषद का गठन औचित्यहीन और जनता के पैसे की बर्बादी है। उन्होंने कहा कि वह प्रदेश के कांग्रेस नेता को याद दिलाना चाहते हैं कि उन्हीं की पार्टी के एक प्रमुख नेता तत्कालीन चुनाव प्रभारी सुरेश पचौरी के सामने भी जब 2002 में विधान परिषद के गठन का विषय आया था तो उन्होंने स्पष्ट कहा था कि यह व्यवस्था छोटे राज्य में नहीं है इसलिए उत्तराखंड में विधान परिषद का कोई औचित्य नहीं है। तब उन्होंने इस विषय को चुनाव घोषणा पत्र में भी शामिल करने से इंकार कर दिया था। श्री महाराज ने कहा कि हिमाचल के साथ-साथ नवगठित छत्तीसगढ़, झारखंड और देश के अन्य किसी भी छोटे राज्य में विधान परिषद नहीं है। आंध्र प्रदेश तक ने अपने यहां विधान परिषद को समाप्त करने का प्रस्ताव पारित किया हुआ है। उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में भी विधान परिषद के गठन की बात कहना सरासर बेईमानी और जनता की गाढी कमाई की लूट के अलावा और कुछ नहीं है। इसके बजाए पूरा पैसा विकास कार्यों में लगने चाहिए ताकि प्रदेश का सर्रवांगीण विकास हो सके।