विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को लेकर भारत निर्वाचन आयोग की दो दिवसीय उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक
देहरादून, न्यूज़ आई : उत्तराखंड में आने वाले साल यानी 2027 में विधानसभा के चुनाव होने हैं. जिसके मद्देनजर जहां एक ओर राजनीतिक पार्टियां दमखम से तैयारी में जुटी हुई है, तो वहीं निर्वाचन आयोग ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी है. इसी कड़ी में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को लेकर भारत निर्वाचन आयोग की टीम ने देहरादून में दो दिवसीय उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की.
देहरादून के एक निजी होटल में 12 और 13 अक्टूबर को हुई इस बैठक में प्रदेश के सभी जिलों के जिलाधिकारी, पुलिस अधिकारी, केंद्र व राज्य सरकार की प्रवर्तन एजेंसियों ने चुनाव तैयारियों, कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित रणनीतियों पर चर्चा किया गया. बैठक के दौरान सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्धारित इलेक्शन प्लानर के अनुरूप काम करने के निर्देश दिए गए. इस बैठक में भारत निर्वाचन आयोग के प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग, महानिदेशक मीडिया आशीष गोयल, महानिदेशक आईटी सीमा खन्ना और मुख्य निर्वाचन अधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम समेत अन्य अधिकारी शामिल रहे. समीक्षा बैठक के पहले दिन सभी जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारियों, उप जिला निर्वाचन अधिकारियों और जिला ईवीएम नोडल अधिकारियों के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की प्रथम स्तरीय जांच (ईवीएम-एफएलसी) कार्यशाला आयोजित की गई.
इस दौरान आयोग की ओर से ईवीएम और वीवीपैट की जांच, भंडारण, आवश्यक मशीनों की उपलब्धता और चुनाव से पूर्व की तकनीकी तैयारियों संबंधी दिशा-निर्देश दिए गए. बैठक में जिलाधिकारियों ने अपने-अपने जिले की मतदाता सूची, बूथ प्रबंधन, प्रशिक्षण, वाहन व्यवस्था, संवेदनशील बूथों की पहचान और चुनाव सामग्री की आवाजाही से जुड़ी तैयारियों की जानकारी दी.
पुलिस अधिकारियों ने फोर्स डिप्लायमेंट प्लान, अपराध नियंत्रण, चुनावी अपराधों की रोकथाम एवं कानून-व्यवस्था की स्थिति पर प्रस्तुतीकरण दिया. बैठक के दूसरे दिन अर्धसैनिक बल, आबकारी, जीएसटी, परिवहन, वन विभाग, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और कस्टम समेत 21 एजेंसियों ने चुनाव तैयारियों से संबंधित जानकारी दी.
सीमावर्ती क्षेत्रों पर निगरानी की समीक्षा: इन एजेंसियों से नकदी, शराब, नशीले पदार्थ, हथियार, सोना-चांदी और अन्य प्रलोभन सामग्री की तस्करी रोकने, चेकपोस्ट संचालन और सीमावर्ती क्षेत्रों पर निगरानी की योजनाओं की समीक्षा की गई. आयोग के अधिकारियों ने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है.
