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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नोजगे पब्लिक स्कूल (हैप्पी होम) पहुंचकर उत्तरांचल पंजाबी महासभा द्वारा आयोजित वैशाखी मेले का दीप जलाकर शुभारंभ किया

देहरादून, न्यूज़ आई : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नोजगे पब्लिक स्कूल (हैप्पी होम) पहुंचकर उत्तरांचल पंजाबी महासभा द्वारा आयोजित वैशाखी मेले का दीप जलाकर शुभारंभ किया। इस दौरान पंजाबी महासभा द्वारा धामी को पगड़ी पहनाकर व प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी को बैसाखी पर्व की ’लख-लख बधाइयां देते हुए गुरुदेव से प्रार्थना की कि यह त्योहार सभी के जीवन में नव-तरंग, नव-उमंग और नव – सृजन लेकर आए। उन्होंने स्मरण करते हुए कहा कि जैसी अनुभूति नानकमत्ता साहिब में कार सेवा के समय होती है, वैसी ही अनुभूति आज बैसाखी मेले में आप सबके बीच उपस्थित होकर हो रही है। उन्होंने कहा किअसभी लोगों विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं के द्वारा जो सम्मान दिया गया है, यह सम्मान मेरे लिए महज सम्मान नहीं, हमारी महान संस्कृति के तेज, त्याग और तपस्या का प्रसाद है, यह सम्मान मेरा नहीं बल्कि प्रदेश की समस्त जनता का सम्मान है। उन्होंने कहा कि इस सम्मान को, इस गौरव को गुरु नानक देव जी के चरणों में समर्पित करता हूँ।
मुख्यमंत्री ने गुरुनानक साहब जी के चरणों में नमन करते हुए नम्रतापूर्वक प्रार्थना करते हुए कहा कि मेरे भीतर का सेवाभाव दिनों दिन बढ़ता रहे और गुरुओं का आशीर्वाद ऐसे ही मुझ पर तथा मेरे प्रदेश की सवा करोड़ जनता पर बना रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह त्योहार विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसी दिन दशम गुरु, गुरु गोविंद सिंह साहब ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि यह खुशियों का पर्व जहां एक ओर समाज के सभी लोगों में प्रेम और भाईचारे की भावना को मजबूती प्रदान करता है वहीं दूसरी ओर देश की तरक्की में योगदान देने का संकल्प लेने की भी प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि यह पर्व हमारी सामाजिक – आर्थिक व्यवस्था में खेती-किसानी की महत्वपूर्ण भूमिका की याद भी दिलाता है। उन्होंने मेले के आयोजन से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को बधाई दी, जिनकी कड़ी मेहनत से मेले को आयोजित करने का प्रयोजन सफल हुआ है। श्री धामी ने कहा कि इस प्रकार के मेले हमारी लोक संस्कृति और ’ लोक परंपराओं को बढ़ावा देने का काम करते हैं। मेले हमारी सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण अंग हैं, ये हमारे जीवन में इन्द्रधनुषीय रंग लाते हैं और खुशियां देते हैं।
मुख्यमंत्री ने अपनी बचपन की यादें ताज़ा करते हुए कहा कि जब मैं, छोटा था, तब मेले में जाने के लिए हमेशा आतुर रहता था क्योंकि मेलों में जहां एक ओर मुझे मेरे पसंदीदा करतब देखने को मिलते थे वहीं तरह – तरह के खिलौने भी मिल जाया करते थे। उन्होंने कहा कि सामान्य परिवार से होने के कारण मैं, अधिक खिलौने खरीद तो नहीं पाता था पर उस जमाने में तो खिलौनों को देखकर ही बहुत आनंद आ जाता था। उन्होंने कहा कि उस समय संचार और परिवहन की सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं, तो इन मेलों और त्यौहारों के द्वारा ही मित्रों और सगे- संबंधियों से मुलाकात संभव हो पाती थी।उन्होंने कहा कि हम सभी ने मिलकर लोकपर्वों और मेलों को संरक्षण प्रदान करना होगा, इसके लिए हम सभी को मिलकर  निरंतर प्रयास करने होंगे।