भाजपा ने एक देश एक चुनाव का समर्थन किया और इसे देश की जरूरत बताया
देहरादून, न्यूज़ आई : प्रदेश भाजपा ने एक देश एक चुनाव का समर्थन किया और इसे देश की जरूरत बताया। पार्टी ने कहा कि इसके लागू होने से राजनीतिक अस्थिरता, विकास कार्यों में बाधा और बेतहाशा खर्च की समस्या का समाधान होगा। देश को नई दिशा मिलेगी। भाजपा ने बुधवार को एक देश-एक चुनाव के बिल पर सुझाव लेने उत्तराखंड पहुंची संयुक्त संसदीय समिति के सामने अपना पक्ष रखा। पार्टी की ओर से सहसपुर के विधायक सहदेव पुंडीर, दायित्वधारी एवं वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. देवेंद्र भसीन, रमेश गढि़या, प्रदेश मंत्री आदित्य चौहान ने संसदीय समिति के सदस्यों से मुलाकात की। उन्होंने समिति को लिखित सुझाव दिए और अपनी राय भी खुलकर व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज भारत बदल रहा है और पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत एक नई ऊंचाई को स्पर्श कर रहा है। प्रधानमंत्री एक भारत श्रेष्ठ भारत के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने ”एक राष्ट्र-एक चुनाव” के सिद्धांत को पुन: प्रतिपादित कर देश को नई दिशा दी है।
उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। परिस्थितिजन्य कारणों से केंद्र, राज्य और स्थानीय निकाय स्तर पर अलग-अलग समय पर चुनाव कराए जाते हैं। इस व्यवस्था के कारण राजनीतिक अस्थिरता, विकास कार्यों में बाधा और अत्यधिक खर्च जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। एक देश, एक चुनाव का विचार इन समस्याओं का समाधान भी है और देश को नए समय के साथ नया आयाम देने वाला है। इसमें लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकाय के चुनाव चरणबद्ध तरीके से कराने की व्यवस्था है। यह व्यवस्था प्रशासनिक सुधार, लोकतंत्र की मजबूती और संसाधनों की बचत की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। कहा कि लगभग हर वर्ष देश के किसी न किसी हिस्से में चुनाव होते रहते हैं और देश हमेशा चुनावी मोड पर रहता है। चुनाव आयोग हो या राजनीतिक दल, प्रशासनिक मशीनरी, सुरक्षा बल व अन्य विभिन्न एजेंसियां देश में कहीं न कहीं चुनाव में व्यस्त दिखाई देती हैं। भाजपा का मानना है कि यह स्थिति जन हित में नहीं है इसलिए एक राष्ट्र एक चुनाव देश के लिए आवश्यक है। एक साथ चुनाव कराने से चुनावों पर वर्तमान में जो खर्च हो रहा है उसमें भारी कटौती आएगी। वर्ष 2024 के लोस चुनाव में ही एक लाख करोड़ रुपये खर्च हुए। यदि चुनाव एक साथ कराए जाएंगे तो खर्च में 12000 करोड़ रुपये की बचत होती और जीडीपी में 1.5 प्रतिशत की वृद्धि होती। एक साथ चुनाव से इन संसाधनों की बचत होगी। चुनाव के कारण बार-बार लागू होने वाली आदर्श आचार संहिता से विकास योजनाएं बाधित होती हैं।
