सीएम धामी की बड़ी घोषणा, हर साल दिया जाएगा हिमालय विभूति सम्मान
देहरादून, न्यूज़ आई : आज 9 सितंबर को हिमालय दिवस के अवसर पर उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय देहरादून में हिमालयो नाम नगाधिराजः कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में सीएम पुष्कर सिंह धामी भी शामिल हुए. इस मौके पर सीएम धामी ने हिमालय परिषद में मूलभूत सुविधाओं और संसाधनों को बढ़ाने के लिए एक करोड़ की धनराशि देने की घोषणा की.
इसी के साथ ही सीएम ने घोषणा किया कि हिमालय के संरक्षण, संवर्धन एवं सतत विकास के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं हिमालयी क्षेत्रों के लिए समर्पित विशिष्ट व्यक्तित्वों को हिमालय विभूति सम्मान प्रदान किया जाएगा. यह सम्मान हर साल हिमालय दिवस के अवसर पर प्रदान किया जाएगा. कार्यक्रम के दौरान सीएम ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित पांच पोस्टरों का विमोचन किया. इनमें 7वें देहरादून इंटरनेशनल साइंस एंड टेक्नोलॉजी फेस्टिवल, साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रीमियर लीग, सीमांत बाल विज्ञान कांग्रेस, ज्ञानोत्कर्ष और 21वीं उत्तराखंड राज्य साइंस कॉन्फ्रेंस के पोस्टर शामिल हैं.
मुख्यमंत्री धामी ने विज्ञान के लोक प्रियकरण पर केंद्रित पत्रिका ‘विज्ञान संप्रेषण’ के पांचवें वार्षिकांक का भी विमोचन किया. इस मौके पर सीएम धामी ने कहा कि हिमालय हमारे लिए केवल एक पर्वत श्रृंखला नहीं, बल्कि हमारी पहचान, संस्कृति और अस्तित्व का आधार है. आदि काल से हिमालय हमारे ऋषियों, मुनियों, साधकों और विचारकों की तपोभूमि रही है. गंगा और यमुना सहित अनेक जीवनदायिनी नदियों का उद्गम हिमालय से होता है. जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग आज पूरी दुनिया के सामने बड़ी चुनौती हैं और इनका प्रभाव हिमालयी क्षेत्रों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है.
साथ ही सीएम धामी ने कहा कि ग्लेशियरों पर बढ़ता दबाव, पारंपरिक जल स्रोतों पर संकट, अतिवृष्टि, भूस्खलन, वनाग्नि और अचानक आने वाली बाढ़ जैसी घटनाएं लगातार नई चुनौतियां खड़ी कर रही हैं. हिमालय की संवेदनशीलता का सम्मान करते हुए विकास कार्यों में विज्ञान, तकनीक, सुरक्षा और प्रकृति के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना आवश्यक है. जलवायु परिवर्तन किसी राज्य या देश की सीमाओं को देखकर अपना प्रभाव नहीं डालता. पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने में बहुत कम योगदान देने वाले हिमालयी क्षेत्रों को भी इसका बड़ा मूल्य चुकाना पड़ सकता है. इसलिए जलवायु परिवर्तन की जिम्मेदारी और उसके समाधान के प्रयास साझा होने चाहिए. हिमालयी राज्यों की इस चिंता और आवाज को राष्ट्रीय एवं वैश्विक मंचों तक और मजबूती से पहुंचाने की आवश्यकता है.
