Breaking News
  • BJP अध्यक्ष नितिन नवीन का उत्तराखंड प्रवास: आज टपकेश्वर मंदिर में किए दर्शन, बूथ अध्यक्ष के घर पहुंचे
  • खटीमा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 89 लाख रुपये की विकास योजनाओं का किया लोकार्पण
  • चारधाम दर्शन को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। चारों धामों में दर्शन को श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग रही
  • मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल यात्रा प्रबंधन ने जीता श्रद्धालुओं का विश्वास
  • केदारनाथ में पहुंच चुके हैं 08 लाख 11 हजार से अधिक श्रद्धालु

उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाने वाले मदरसे होंगे बंद: सीएम धामी

देहरादून, न्यूज़ आई : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंच से संबोधन के दौरान मदरसे शिक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि सबको शिक्षा का अधिकार मिले, इसलिए राज्य में एक ओर ऐतिहासिक निर्णय लिया है. जो उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड कई वर्षों से संचालित था, उस बोर्ड को भंग करने का निर्णय लिया है. जितने भी मदरसे उत्तराखंड में संचालित हो रहे हैं, उनमें जुलाई 2026 से उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम को पढ़ाया जाएगा. सीएम धामी ने साफ तौर पर कहा कि जिन मदरसों में शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाया जाएगा, उन मदरसों को बंद कर दिया जाएगा.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तरी हरिद्वार स्थित अखंड परमधाम आश्रम में अयोध्या राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य युगपुरुष स्वामी परमानंद गिरी के 71 वें संन्यास जयंती महोत्सव में शिरकत की. इस दौरान उन्होंने आश्रम के नए घाट का शिलान्यास किया. नमामि गंगे परियोजना के तहत घाट का निर्माण होगा.उधर, सीएम धामी के मदरसा बोर्ड पर निर्णय की साधु संतों ने सराहना की. निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि ने भी कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है और देवभूमि में वैध या अवैध किसी तरह के मदरसों की कोई जरूरत नहीं है. परमार्थ आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि महाराज ने कहा कि, मदरसा बोर्ड भंग करने का उद्देश्य यही है कि देश की जो शिक्षा नीति है, उसमें सबको शिक्षा का सामान अधिकार मिले. केवल धर्म की शिक्षा नहीं बल्कि बच्चे विज्ञान गणित और भूगोल भी पढ़ें.

गौर है कि उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म कर दिया गया है. उसकी जगह धामी सरकार ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया है. इसके तहत अब राज्य के मदरसा संचालकों को उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त करनी होगी और उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद (उत्तराखंड बोर्ड) से संबद्धता लेनी होगी.