Breaking News
  • श्रीनगर में बीजेपी को बड़ा झटका, ओबीसी जिला उपाध्यक्ष कांग्रेस में शामिल, समर्थकों ने भी थामा दामन
  • बदरीनाथ धाम में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में नई पहल
  • उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कुनबा बढ़ा रही कांग्रेस, आज राजनीतिक, सैन्य एवं प्रशासनिक सेवा से जुड़े कई लोग कांग्रेस में हुए शामिल
  • त्योहारी सीजन से पहले मिलावटखोरों पर शिकंजा, लक्सर में नकली पनीर फैक्टरी सील
  • हारी सीजन से पहले मिलावटखोरों पर शिकंजा, लक्सर में नकली पनीर फैक्टरी सील

मुख्यमंत्री धामी पीछे नहीं हटे, सीबीआई जांच का लिया कठोर फैसला

देहरादून, न्यूज़ आई : पेपर लीक प्रकरणों के बाद राज्य के इतिहास में पहली बार किसी सरकार ने इसे रोकने के लिए सबसे सख्त कानून बनाया था। यह कानून मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ऐतिहासिक कदमों में से एक है। खुद सीएम से लेकर भाजपा उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय) अध्यादेश 2023 को निष्पक्ष-पारदर्शी भर्ती परीक्षा कराने के साथ नकल माफिया पर शिकंजे के लिए बड़ी उपलब्धि मान रहे थे। सरकार का मानना है कि सख्त नकलरोधी कानून के लिए 100 से अधिक नकल माफिया को जेल भेजा गया। दूसरी बार नए कानून के तहत जब हाकम सिंह की एक दिन पहले गिरफ्तारी हुई तो सरकार और पार्टी में उत्साह दिखा लेकिन परीक्षा के दिन हरिद्वार के एक केंद्र से प्रश्नपत्र के तीन पेज सोशल मीडिया पर वायरल होने से कहीं न कहीं इस कानून की साख दांव पर लग गई। इसे बचाना भी सीएम के लिए एक चुनौती थी। हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की न्यायिक निगरानी में एसआईटी जांच की घोषणा की लेकिन आंदोलन कर रहे युवाओं ने सेवानिवृत्त जज बीएस वर्मा के भाजपा नेताओं से रिश्ते निकाल दिए। सरकार ने अगले दिन हाईकोर्ट के रिटायर्ड न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया। अब सीबीआई जांच का कठोर फैसला लिया।

मुख्यमंत्री धामी ने युवाओं से भावुक अपील करते हुए कहा कि वो जानते हैं कि उत्तराखंड के युवा और छात्र पढ़ाई के बाद सरकारी नौकरी के लिए तैयारी करते हैं। इसी आधार पर उनके पास जीवन के लिए खूबसूरत सपने होते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने खुद ऐसी परिस्थितियों को देखा है, छात्रों और युवाओं के बीच काम करते हुए, इसका अनुभव लिया है।